रूबरू | Part 11 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships

मिस्टर बॉस हंस लो जितना हंसना है... आप के रोने के दिन आ गए हैं।

तुम इस की बात का बुरा मत मानना, यह ऐसे ही मज़ाक करता है। आओ तुम नाश्ता करो।

दादी ने बैठने का इशारा किया।

यह हमारे साथ नाश्ता करेगी? 

हां क्यूं? दादी ने आंखें बड़ी कीं।

यह आपकी केयरटेकर है। हमारे साथ नहीं बैठ सकती। ताबिश ने हैसियत का फर्क जताया।

मैंने इससे कहा है कि यह हमारे साथ नाश्ता करेगी। दादी ने बात क्लियर की।

आप लोग नाश्ता करें, कहते ही वह जाने के लिए मुड़ी।

कहां जा रही हैं, मिस? यहीं रहिए... दादी को कभी भी तुम्हारी ज़रूरत पड़ सकती है। चुपचाप खड़ी रहें। और हमारा हुक्म मानें। अपनी बात कहकर ताबिश जूस का गिलास उठाकर पीने लगा।

दादी ने भी खामोश रहना मुनासिब समझा।

नाश्ता करते ही वह दोनों उठ गए।

हमारी चाय लेकर हॉल में आएं। वह उसे आर्डर करता उसके बगल से निकल कर आगे बढ़ गया।

दादी उसे नाराज़गी से देखती हैं लेकिन वह देखकर भी अंजान बन गया।

हॉल में दोनों को चाय देकर वह चुपचाप वहीं खड़ी रही।

अब हमारे सिर पर क्यों खड़ी हो? बाहर जाओ...जब आवाज़ दिया जाए तब आना। वह गुस्से से चीखा।

दादी उसके अंदाज़ पर उसे देखती रह गईं। इस तरह तो यह किसी से बात नहीं करता। फिर यह आज ऐसा क्यों कर रहा है।

मायरा चुपचाप बाहर चली गई। लेकिन उसका दिल अंदर ही अदर रो पड़ा। लेकिन उसे मज़बूत बनना था। 

सारी बात फाइनल थी उसके बाद भी यह केयरटेकर? इसका रजिस्ट्रेशन भी नहीं था। आप समझ सकती हैं कि यह हमारे लिए कितनी खतरनाक हो सकती है। ताबिश नाराज़गी जता गया। अपनी बात कहते हुए उसकी आवाज़ तेज़ हो गई। जबकि वह ऐसा नहीं चाहता था।

यह तो बहुत प्यारी है... यह हमारी दुश्मन नहीं हो सकती। दादी के आंखों में उसका मोहना चेहरा आ गया। उनकी आंखों में चमक और होंठ मुस्कुरा उठे।

खूबसूरत लोग ही तो खतरनाक होते हैं... अब आप ही देख लें। उसकी खूबसूरती देखकर आपने उसे केयरटेकर चुन लिया। यह जाने बिना कि वह कौन है? क्यों आई है? ताबिश नाराज़गी से बोला लेकिन इस बार उसका लहजा नार्मल रहा।

अब तो रख लिया। वैसे एक बात बताऊं...यह मेरे दोस्त की बेटी है। दादी के चेहरे की खुशी देखने लायक थी।

कौन से दोस्त की बेटी? ताबिश हैरान हुआ। एक के बाद एक झटके उसकी परेशानी बढ़ा लरहे थे।

ऐसा मैंने सबसे कहा है। वह यहां पर मेरे दोस्त की बेटी बनकर रहेगी। 

मायरा केयरटेकर है...यह बात सिर्फ हम कुछ लोग ही जानते हैं। दादी ऐसा खुश होकर बता रही थी जैसे वह बहुत आम से बात हो। जबकि ताबिश के लिए यह परेशानी वाली बात थी।

इस पर इतनी मेहरबानी क्यों? इसका यहां आने का कोई मकसद हो सकता है। आप समझ नहीं रहीं हैं दादी...ताबिश दादी को समझा नहीं पा रहा था।

अगर उसके यहां आने का कोई मकसद है तो मेरा भी उसे यहां रखने का कोई मकसद है। दादी उसे देखती हैं जो उलझा हुआ था। लेकिन दादी इस वक्त सारी बातें नहीं बता सकती थी।

आपका क्या मकसद है भला? हैरान होने की बारी अब उसकी थी। 

वक्त आने पर बता दूंगी। और हां... ऐसा नहीं है कि मैं इसकी तरफ से अंजान हूं। मेरी नज़र भी है मायरा पर। तुम परेशान मत हो। दादी ने उसे परेशान देखकर तसल्ली दी।

ठीक है दादी...कहते ही वह पास रखी बेल बजाता है। वह नहीं चाहता था कि दादी उसकी वजह से परेशान हों। इसलिए उसने बात खत्म कर दी।

जी, एक लेडी स्टाफ तुरंत आ गई।

उस लड़की को भेजो, उसे नाम याद ही नहीं आ रहा था।

और वह हैरान थी कि कौन लड़की? घर में हज़ारों लड़कियां हैं।

मायरा को, दादी ने उसकी परेशानी दूर कर दी।

मायरा के अंदर आते ही ताबिश किसी को फोन करता है।

एक स्टाफ वहां आ गया।

राहुल, मिस मायरा को वाई-फाई दे दें। वॉकी-टॉकी भी। और सारी बातें अच्छे से समझा दें। ताबिश कहते ही उठ खड़ा हुआ।

ओके सर...

मायरा तुम ने नाश्ता किया? दादी को फिक्र हुई।

नहीं,

जाओ पहले नाश्ता करो, फिर सारी बातें समझ लेना। दादी को उसकी फिक्र हुई।

वह परेशानी से एक नज़र दादी की ओर और फिर ताबिश की ओर देखती है कि किसकी बात पहले माने। उसने यहां आकर गलती कर दी। इस वक्त उसके मन में पहला ख्याल आया।

राहुल, मिस मायरा के नाश्ता करते ही सारी बातें बता दें। कहते ही वह बाहर निकल कर अपने कमरे की तरफ बढ़ गया। वह सिर्फ दादी की वजह से खामोश था। दादी को बहुत दिनों के बाद उसने इस तरह उन्हें खुश देखा था। 

वह किचन में जाकर पहले नाश्ता करती है फिर दवा खाने के लिए कमरे में चली गई।

दरवाज़ा खोलते ही वह हैरान रह गई, क्योंकि ताबिश सोफे पर आराम से बैठा फोन चला रहा था।

आप यहां मेरे कमरे में? उसे इस तरह अपने कमरे में देखकर उसे गुस्सा तो बहुत तेज़ आया। लेकिन वह गुस्सा जता नहीं पाई।

तुम शायद भूल रही हो यह घर मेरा है...वह कहां कम था। 

लेकिन यह कमरा दादी ने मुझे दिया है। इस लिए जब तक मैं यहां हूं इस कमरे पर मेरा अधिकार है। आप इस तरह मेरे कमरे में नहीं आ सकते। आगे से ध्यान रखना। खुद को नार्मल रखते-रखते भी उसे गुस्सा आ ही गया। इस तरह किसी के कमरे में आना कहां की तमीज़ थी।

नाश्ता कर लिया। ताबिश उसकी बात नज़रंदाज़ कर गया। उससे बातें करके उसे अच्छा लग रहा था। उसके दिल ने यह महसूस किया।

हां कर लिया।

खा लो- वह दवा खोलकर उसके सामने करता है।

इतनी मेहरबानी की वजह? दवा लेकर खाने के बाद वह उसकी आंखों में आंखें डालकर पूछ उठी।

बहुत जल्द पता चल जायेगा। वैसे हाथ का दर्द कैसा है? बेसाख्ता उसके होंठों पर मुस्कान छा गई। 

जैसा भी है आपसे मतलब... दर्द देकर दवा देने का फायदा।

मेरी बात का सीधे से जवाब देना वरना...

वरना क्या मिस्टर बॉस? वह भी अड़ गई।

मिस्टर बॉस...उठकर मन ही मन उसकी बात दोहराता वह बाहर निकल गया।

थोड़ी देर बाद मिस्टर सुब्हान ताबिश के रूम में थे।

आपको क्या लगता है मिस मायरा का यहां आने का क्या मकसद हो सकता है? ताबिश की नज़र मिस्टर सुब्हान पर थी।

वही बात तो हम भी जानने में लगे हुए हैं। लेकिन उसका कुछ तो मकसद है यहां आने का। क्योंकि उसने एग्रीमेंट पेपर भी बिना पढ़े साइन कर दिया था। 

क्या? ताबिश गुत्थी को सुलझाने में लगा था लेकिन यहां तो सब और उलझ रहा था।

हां, इसी बात पर तो हम भी हैरान हैं। इससे एक बात तो साफ है कि उसका मकसद हर हाल में यहां आना था।

और उसकी किस्मत अच्छी थी... वह कामयाब रही।

दादी ने उसे क्यों चुना। जबकि उनको पता था कि किसी का सेलेकशन नहीं करना था। उसके बावजूद... मिस्टर सुब्हान बात अधूरी छोड़कर खामोश हो गए। क्योंकि सामने कोई आम इंसान नहीं था।

और यहां आते ही उसे अपनी दोस्त की बेटी बता रही हैं। यह बात भी समझ नहीं आ रही। 

यही बात तो मैं भी नहीं समझ पा रहा कि दोस्त की बेटी बनाने की वजह...ताबिश ने भी दिल की बात कही।

कहीं दादी पर किसी का दबाव तो नहीं। कोई धमकी या कोई डर... मिस्टर सुब्हान ने साफ बात की। क्योंकि इस वक्त की खामोशी आगे उनके लिए परेशानी खड़ी कर सकती थी।

ऐसा तो मैंने सोचा ही नहीं था। टेंशन ताबिश के चेहरे पर साफ दिख रही थी।

जब तक हमें दुश्मन का पता नहीं लग जाता, तब तक हर कोई हमारा दुश्मन है इस बात का ध्यान रखना। मिस्टर सुब्हान उसे समझाते हैं।

दादी के सबसे करीब आप ही रहते हैं। आप देखें कि कहीं वह दादी को कोई धमकी तो नहीं देती। वह दादी से कैसे बात करती है। 

क्यों दादी उसको इतना सम्मान दे रही हैं। मिस्टर सुब्हान उसे खुल कर समझाते हैं। क्योंकि यह उनकी ज़िंदगी का मसला था। और वह किसी भी हालत में उनकी ज़िन्दगी में कोई खिलवाड़ नहीं चाहते थे।

ठीक है आप जाए, मैं देखता हूं। ताबिश उठ खड़ा हुआ।

आप अपना भी ख्याल रखें, वह भी उठ गए।

क्या फायदा ऐसी ज़िन्दगी का... उसकी आवाज़ धीमी हुई। खुद पर कंट्रोल करते हुए भी उसका गला रूंध गया।

निराश मत हो, सब ठीक हो जायेगा। वह ताबिश का कंधा थपथपाते हैं। 

और वह जवाब देने के बजाय खाली नज़रों से उन्हें देखता है। वह भी खामोशी से बाहर निकल गए। क्योंकि अब कहने के लिए कुछ नहीं बचा था।

मिस मायरा तुम्हारे यहां आने का मकसद हमें बहुत जल्द पता चल जायेगा। तुम चालाकी से ब्लैक हाउस आ तो गई हो। लेकिन एग्रीमेंट पेपर को बिना पढ़े साइन करके तुमने गलती कर दी। और यही गलती तुमको बहुत भारी पड़ने वाली है।

जारी है...


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